美国声称扣押了一艘朝鲜货轮,指它被用于违反国际制裁令的相关行为。这艘货轮被扣押的时间是去年,目前正在运往美国途中。
美国司法部称,该艘轮船是用来运输煤炭,而这是联合国对朝制裁令的禁运货物之一,也是朝鲜最大的出口商品。
该船最先是在2018年4月在印度尼西亚被扣押。尽管如此,这仍是截至目前美国第一次以违反制裁令为由扣押朝鲜轮船,消息的公布正值美朝关系转坏之际。
朝鲜领导人金正恩与美国总统特朗普二月在河内进行的会面未能达到任何共识。美国坚持要求朝鲜放弃核项目,而平壤则要求放宽制裁。
朝鲜在过去一星期内进行了两次武器试验,外界广泛将此视作是朝鲜在未能取得美国让步之后,意图向美国施压。
“与武器试验无关”
该船名为“Wise Honese(智诚号)”,于去年第一次被扣押。美国在2018年7月颁发了扣押令。
印度尼西亚将此船交给美国,目前该船正在运往美国途中。
美国官员强调,此时宣布这件事,与朝鲜最近的武器试验无关。
“我们的办公室发现了朝鲜的计划,(他们)通过掩饰‘智诚号’的所属地,将数以吨计的高品位煤出口给外国买家,”美国检控官乔弗里·S·伯曼(Geoffrey S Berman)说。
“这个计划不仅让朝鲜逃避了制裁,也让‘智诚号’能够被用来将重型机械入口朝鲜,帮助朝鲜扩大其能力,并继续形成逃避制裁的循环。”
有消息指,“智诚号”的维护费用是由一家对此没有疑心的美国银行支付——这给了美国当局机会,以较为少见的民事没收形式采取法律行动。
由于平壤此前发展核武器项目的尝试以及一系列导弹试验,朝鲜受到美国和国际社会的一连串制裁。
停滞的美朝谈判
最近的大部分事情都显示,美朝两国正在再次走向敌对,不过美国对朝政策特别代表史蒂芬·比根(Stephen Biegun)目前正身在韩国,讨论如何重启无核化谈判。
美国总统特朗普表示,对于朝鲜最新一轮试验,“没有人会高兴”。
特朗普表示:“我知道他们想要谈判,他们正在说谈判的事,但我不认为他们已经准备好了要谈判。”
去年,特朗普与金正恩会面,成为第一个与朝鲜最高领导人会面的在任美国总统,然而该次会面以及此后的后续会面,都没能帮助在解除朝鲜半岛核武方面取得实质进展。
去年,金正恩表示,他将会停止核试验,也不会再试射洲际弹道导弹,但现在显示,核武活动似乎仍然在继续。
特朗普与金正恩在此前的谈判之后同意,双方共同努力将朝鲜战争中死亡的美国服役人员遗骸送回美国。这是双方达成的少数共识之一,但现在这个行动也已经停止。
Friday, May 10, 2019
Tuesday, April 23, 2019
आईएस ने ली धमाकों की जिम्मेदारी, मंत्री ने कहा- ब्लास्ट क्राइस्टचर्च हमले का बदला
कोलंबो. श्रीलंका में हुए धमाकों की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने ली है। वहीं, श्रीलंका के मंत्री रूवन विजयवर्धने ने कहा कि शुरुआती जांच बताती है कि देश में हुए धमाके क्राइस्टचर्च (न्यूजीलैंड) हमले का बदला हैं। रूवन ने नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) समेत देश के दो इस्लामिक संगठनों को धमाकों के लिए जिम्मेदार बताया था। श्रीलंका में 21 अप्रैल को चर्चों और होटलों में हुए सीरियल धमाकों में 321 लोग मारे गए थे। 22 अप्रैल को एक बस स्टैंड में करीब 87 बम बरामद किए गए थे। क्राइस्टचर्च में 15 मार्च को दो मस्जिदों में हमला हुआ था, जिसमें 50 लोग मारे गए थे।
विजयवर्धने ने बताया, "हमले से पहले कुछ सरकारी अधिकारियों को भेजे गए एक खुफिया मेमो के मुताबिक, इस्लामिक चरमपंथी समूह के एक सदस्य ने क्राइस्टचर्च शूटिंग के बाद सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी सामग्री पोस्ट की थी।" सरकार ने नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) को धमाकों का जिम्मेदार बताया था। विजयवर्धने एनटीजे पर बैन लगाने का कह चुके हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने इमरजेंसी की घोषणा कर चुके हैं।
'सरकार सुरक्षा में नाकाम रही'
विपक्ष के नेता और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा करने में नाकाम रही है। जब मैंने सत्ता सौंपी थी तो देश आतंकवाद से मुक्त था। मेरी सरकार के दौरान देश में कोई हमला नहीं हुआ। अगर सरकार लोगों की सुरक्षा नहीं कर सकती तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं।
2014 में हुई थी एनटीजे की स्थापना
एनटीजे की स्थापना 2014 में श्रीलंका के कट्टनकुंडी क्षेत्र में जहरान हाशिम उर्फ अबु उबैदा ने की थी। यह पूर्वी श्रीलंका का मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। माना जा रहा है कि जिस आत्मघाती हमलावर ने शांगरी ला होटल को निशाना बनाया, वह जहरान ही था।
अब तक 40 संदिग्ध गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक 40 संदिग्धाें को गिरफ्तार किया जा चुका है। रविवार देर रात पुलिस को कोलंबो एयरपोर्ट के पास छह फीट लंबा पाइप बम मिला। इसे एयरफोर्स ने डिफ्यूज कर दिया।
स्थानीय स्तर पर बना था बम
एयरफोर्स के प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन गिहान सेनेविरत्ने ने बताया कि एयरपोर्ट पर मिला आईईडी स्थानीय स्तर पर बना था। बम के मिलने के बाद एयरपोर्ट जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। श्रीलंका की एयरलाइन कंपनियों ने भी कड़ी सुरक्षा जांच के चलते यात्रियों को फ्लाइट के उड़ान भरने से चार घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचने के निर्देश जारी कर दिए।
कोलंबो में हुआ था पहला धमाका
पहला धमाका कोलंबो के कोच्चिकड़े स्थित सेंट एंथनी चर्च में हुआ, इसके बाद नेगोंबो के कटुवपिटिया स्थित सेंट सेबेस्टियन चर्च और बट्टीकलोआ स्थित चर्च में धमाके हुए। इनके अलावा कोलंबो के फाइव स्टार होटलों शांगरी ला, किंग्सबरी और सिनेमन ग्रैंड में भी ब्लास्ट हुए। आठ में से शुरुआती छह धमाके लगभग एक ही समय पर सुबह 8:45 बजे हुए। बाकी दो धमाके दोपहर में दो से ढाई बजे के बीच कोलंबो में हुए।
विजयवर्धने ने बताया, "हमले से पहले कुछ सरकारी अधिकारियों को भेजे गए एक खुफिया मेमो के मुताबिक, इस्लामिक चरमपंथी समूह के एक सदस्य ने क्राइस्टचर्च शूटिंग के बाद सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी सामग्री पोस्ट की थी।" सरकार ने नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) को धमाकों का जिम्मेदार बताया था। विजयवर्धने एनटीजे पर बैन लगाने का कह चुके हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने इमरजेंसी की घोषणा कर चुके हैं।
'सरकार सुरक्षा में नाकाम रही'
विपक्ष के नेता और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा करने में नाकाम रही है। जब मैंने सत्ता सौंपी थी तो देश आतंकवाद से मुक्त था। मेरी सरकार के दौरान देश में कोई हमला नहीं हुआ। अगर सरकार लोगों की सुरक्षा नहीं कर सकती तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं।
2014 में हुई थी एनटीजे की स्थापना
एनटीजे की स्थापना 2014 में श्रीलंका के कट्टनकुंडी क्षेत्र में जहरान हाशिम उर्फ अबु उबैदा ने की थी। यह पूर्वी श्रीलंका का मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। माना जा रहा है कि जिस आत्मघाती हमलावर ने शांगरी ला होटल को निशाना बनाया, वह जहरान ही था।
अब तक 40 संदिग्ध गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक 40 संदिग्धाें को गिरफ्तार किया जा चुका है। रविवार देर रात पुलिस को कोलंबो एयरपोर्ट के पास छह फीट लंबा पाइप बम मिला। इसे एयरफोर्स ने डिफ्यूज कर दिया।
स्थानीय स्तर पर बना था बम
एयरफोर्स के प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन गिहान सेनेविरत्ने ने बताया कि एयरपोर्ट पर मिला आईईडी स्थानीय स्तर पर बना था। बम के मिलने के बाद एयरपोर्ट जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। श्रीलंका की एयरलाइन कंपनियों ने भी कड़ी सुरक्षा जांच के चलते यात्रियों को फ्लाइट के उड़ान भरने से चार घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचने के निर्देश जारी कर दिए।
कोलंबो में हुआ था पहला धमाका
पहला धमाका कोलंबो के कोच्चिकड़े स्थित सेंट एंथनी चर्च में हुआ, इसके बाद नेगोंबो के कटुवपिटिया स्थित सेंट सेबेस्टियन चर्च और बट्टीकलोआ स्थित चर्च में धमाके हुए। इनके अलावा कोलंबो के फाइव स्टार होटलों शांगरी ला, किंग्सबरी और सिनेमन ग्रैंड में भी ब्लास्ट हुए। आठ में से शुरुआती छह धमाके लगभग एक ही समय पर सुबह 8:45 बजे हुए। बाकी दो धमाके दोपहर में दो से ढाई बजे के बीच कोलंबो में हुए।
Wednesday, April 10, 2019
लोकसभा चुनाव 2019: बिहार में लालू के MY से तेजस्वी के MUNIYA तक
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने हाल ही में बनी 'विकासशील इंसान पार्टी' (वीआईपी) के लिए तीन सीटें छोड़ीं तो उसके इस फ़ैसले से सबको हैरानी हुई.
हैरत की वजह ये थी कि वीआईपी लगभग छह महीने पहले बनी थी और आरजेडी ने इतनी तवज्जो दी.
वैसे ये फ़ॉर्मूला नया नहीं है. लालू प्रसाद यादव पहले से ये फ़ॉर्मूला अपनाते आए हैं. ये आरजेडी की दलितों और पिछड़ों को अपने साथ जोड़ने की एक और कोशिश है जो पिछले कुछ सालों में किसी न किसी वजह से आरजेडी को छोड़ गए हैं.
कई राजनीतिक पंडित, ख़ासकर दिल्ली में बैठे लोग, उस वक़्त भी हैरत में थे जब आरजेडी ने उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के लिए पांच और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के लिए तीन सीटें दीं.
90 के दशक में बिहार के तमाम चुनावों में लालू यादव की जीत का श्रेय उस विविधतापूर्ण गठबंधन को दिया गया जो उन्होंने अगस्त 1990 में मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू होने के बाद बनाया था.
लेकिन 1994 में नीतीश कुमार ने लालू का साथ छोड़ा और बीजेपी का हाथ थाम लिया. इसके बाद लालू यादव की पार्टी धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ती गई. हालांकि कुछ सालों बाद दलित नेता राम विलास पासवान लालू की धारा में जुड़ गए.
24 नवंबर, 2005 को बिहार का मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने अपना ख़ुद का फ़ॉर्मूला बनाया. उन्होंने स्थानीय निकाय के चुनाव में अति पिछड़े वर्ग को 20 फ़ीसदी सीटें देकर लुभाना शुरू किया.
इससे नीतीश कुमार को अपना वोटबैंक मज़ूबत करने में मदद मिली और अति पिछड़े वर्ग के नेता धीरे-धीरे नीतीश की पार्टी यानी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की तरफ़ आकर्षित होने लगे.
निषाद या सहनी जैसी कई उप-जातियां बिहार की राजनीतिक गणित में अहम भूमिका निभाती हैं और ये अति पिछड़े वर्ग का बड़ा हिस्सा हैं. बिहार में निषाद समुदाय नाव चलाने, नाव बनाने और मछली पकड़ने जैसे पारंपरिक कामों के ज़रिए अपनी जीविका चलाता है.
वीआईपी के संस्थापक मुकेश सहनी कहते हैं कि निषादों की संख्या बिहार की कुल आबादी का लगभग 15 फ़ीसदी है. बिहार में नदी किनारे वाले इलाक़ों में इनकी अच्छी-ख़ासी मौजूदगी देखी जा सकती है. यहां ये बताना भी ज़रूरी है कि ऐसे कई इलाक़ों में यादवों की आबादी भी ठीक ठाक है.
चूंकि राज्य में निषाद समुदाय की आबादी काफ़ी है इसलिए वो सूबे की राजनीति में हमेशा से मांग में रहे हैं. हालांकि निषाद नेताओं को आगे ले आने वाला कोई और नहीं बल्कि लालू यादव थे.
उन्होंने कुछ निषाद नेताओं को अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाया. इसके अलावा लालू ने कप्तान जय नारायण निषाद को मुज़फ़्फ़पुर से पार्टी का उम्मीदवार बनाया जो उस ज़माने में एक असाधारण फ़ैसला था.
बाद में कप्तान निषाद नीतीश के और फिर भगवा ख़ेमे में आ गए. उनके बेटे अजय निषाद ने पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर मुज़फ़्फ़रनगर सीट जीती थी और इस बार भी वो बीजेपी के टिकट से ही चुनाव लड़ रहे हैं.
मुकेश सहनी ने चार नवंबर, 2018 में वीआईपी बनाई और उनकी पार्टी तीन सीटों- मधुबनी, खगड़िया और मुज़फ़्फ़रपुर से चुनाव लड़ रही है. सहनी के साथ समस्या ये है कि उनके उम्मीदवार जिन सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं वहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी अच्छी ख़ासी है.
मुकेश सहनी ख़ुद खगड़िया से मैदान में हैं. खगड़िया वही निर्वाचन क्षेत्र है जहां से एनडीए के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने अपने मौजूदा सांसद चौधरी महबूब अली क़ैसर को एक बार फिर मैदान में उतारा है.
यही वजह है कि खगड़िया में मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए वीआईपी पड़ोसी जिले बेगूसराय में आरजेडी के उम्मीदवार तनवीर हसन का समर्थन कर रही है न कि सीपीआई के प्रत्याशी कन्हैया कुमार का.
मुकेश सहनी ने बॉलीवुड की दुनिया से राजनीति में क़दम रखा है. उनका कहना है कि वो इस धारणा को ख़त्म करना चाहते हैं कि उनकी जाति मुसलमानों के ख़िलाफ़ है.
2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सहनी के साथ बिहार के कई इलाक़ों का दौरा किया था. इसके अलावा सहनी पर जनवरी, 2015 में हुए अज़ीज़पुर दंगों के पीछे होने के आरोप भी लगे थे.
ये दंगा वैशाली ज़िले के एक गांव में हुआ था जहां निषाद समुदाय बहुसंख्यक है. इस दंगे में मुस्लिम समुदाय के चार व्यक्तियों की मौत हुई थी.
निषाद और नदियों से जुड़े कारोबार करने वाले समुदायों के लिए मुश्किलें तब आनी शुरू हुईं जब पुल, बैराज और बांध बनने लगे. मिसाल के तौर पर फ़रक्का बराज बनने के बाद इन समुदायों को भारी आर्थिक नुक़सान हुआ.
गंगा और उसकी सहायक नदियों में चलने वाली नावों की संख्या में तेज़ी से गिरावट आई है.
बैराज के बनने से नदियों में ऊपर से मछलियां आनी कम हो गईं हैं. नतीजन, कई तालाब और नदियां होने के बावजूद बिहार अब मछलियों के लिए आंध्र प्रदेश पर निर्भर हो गया है.
यही वजह है कि पिछले साल जब राज्य सरकार ने आंध्र प्रदेश से आने वाली मछलियों पर ये दलील देकर पाबंदी लगाई कि इनसे कैंसर हो रहा है तो इस कारोबार से जुड़े लोगों ने इस पर शक ज़ाहिर किया.
पिछले कई सालों में सहनी जाति के लोग बड़ी संख्या में बेरोज़गार हुए और प्रवासी मज़दूर बनकर दूसरे राज्यों में पलायन कर गए. इनमें से कुछ तो अपराध की दुनिया में शामिल हो गए.
इस हालात को भांपकर ही ख़ुद को 'सन ऑफ़ मल्लाह' (मल्लाह का बेटा) कहने वाले मुकेश सहनी ने वीआईपी बनाई. पार्टी बनाने के पीछे निश्चित तौर पर उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा थी.
निषाद समुदाय के राजनीतिक महत्व को समझते हुए ही सालों पहले उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मिर्ज़ापुर की पूर्व दस्युरानी फूलन देवी को टिकट दिया था.
हैरत की वजह ये थी कि वीआईपी लगभग छह महीने पहले बनी थी और आरजेडी ने इतनी तवज्जो दी.
वैसे ये फ़ॉर्मूला नया नहीं है. लालू प्रसाद यादव पहले से ये फ़ॉर्मूला अपनाते आए हैं. ये आरजेडी की दलितों और पिछड़ों को अपने साथ जोड़ने की एक और कोशिश है जो पिछले कुछ सालों में किसी न किसी वजह से आरजेडी को छोड़ गए हैं.
कई राजनीतिक पंडित, ख़ासकर दिल्ली में बैठे लोग, उस वक़्त भी हैरत में थे जब आरजेडी ने उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के लिए पांच और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के लिए तीन सीटें दीं.
90 के दशक में बिहार के तमाम चुनावों में लालू यादव की जीत का श्रेय उस विविधतापूर्ण गठबंधन को दिया गया जो उन्होंने अगस्त 1990 में मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू होने के बाद बनाया था.
लेकिन 1994 में नीतीश कुमार ने लालू का साथ छोड़ा और बीजेपी का हाथ थाम लिया. इसके बाद लालू यादव की पार्टी धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ती गई. हालांकि कुछ सालों बाद दलित नेता राम विलास पासवान लालू की धारा में जुड़ गए.
24 नवंबर, 2005 को बिहार का मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने अपना ख़ुद का फ़ॉर्मूला बनाया. उन्होंने स्थानीय निकाय के चुनाव में अति पिछड़े वर्ग को 20 फ़ीसदी सीटें देकर लुभाना शुरू किया.
इससे नीतीश कुमार को अपना वोटबैंक मज़ूबत करने में मदद मिली और अति पिछड़े वर्ग के नेता धीरे-धीरे नीतीश की पार्टी यानी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की तरफ़ आकर्षित होने लगे.
निषाद या सहनी जैसी कई उप-जातियां बिहार की राजनीतिक गणित में अहम भूमिका निभाती हैं और ये अति पिछड़े वर्ग का बड़ा हिस्सा हैं. बिहार में निषाद समुदाय नाव चलाने, नाव बनाने और मछली पकड़ने जैसे पारंपरिक कामों के ज़रिए अपनी जीविका चलाता है.
वीआईपी के संस्थापक मुकेश सहनी कहते हैं कि निषादों की संख्या बिहार की कुल आबादी का लगभग 15 फ़ीसदी है. बिहार में नदी किनारे वाले इलाक़ों में इनकी अच्छी-ख़ासी मौजूदगी देखी जा सकती है. यहां ये बताना भी ज़रूरी है कि ऐसे कई इलाक़ों में यादवों की आबादी भी ठीक ठाक है.
चूंकि राज्य में निषाद समुदाय की आबादी काफ़ी है इसलिए वो सूबे की राजनीति में हमेशा से मांग में रहे हैं. हालांकि निषाद नेताओं को आगे ले आने वाला कोई और नहीं बल्कि लालू यादव थे.
उन्होंने कुछ निषाद नेताओं को अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाया. इसके अलावा लालू ने कप्तान जय नारायण निषाद को मुज़फ़्फ़पुर से पार्टी का उम्मीदवार बनाया जो उस ज़माने में एक असाधारण फ़ैसला था.
बाद में कप्तान निषाद नीतीश के और फिर भगवा ख़ेमे में आ गए. उनके बेटे अजय निषाद ने पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर मुज़फ़्फ़रनगर सीट जीती थी और इस बार भी वो बीजेपी के टिकट से ही चुनाव लड़ रहे हैं.
मुकेश सहनी ने चार नवंबर, 2018 में वीआईपी बनाई और उनकी पार्टी तीन सीटों- मधुबनी, खगड़िया और मुज़फ़्फ़रपुर से चुनाव लड़ रही है. सहनी के साथ समस्या ये है कि उनके उम्मीदवार जिन सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं वहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी अच्छी ख़ासी है.
मुकेश सहनी ख़ुद खगड़िया से मैदान में हैं. खगड़िया वही निर्वाचन क्षेत्र है जहां से एनडीए के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने अपने मौजूदा सांसद चौधरी महबूब अली क़ैसर को एक बार फिर मैदान में उतारा है.
यही वजह है कि खगड़िया में मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए वीआईपी पड़ोसी जिले बेगूसराय में आरजेडी के उम्मीदवार तनवीर हसन का समर्थन कर रही है न कि सीपीआई के प्रत्याशी कन्हैया कुमार का.
मुकेश सहनी ने बॉलीवुड की दुनिया से राजनीति में क़दम रखा है. उनका कहना है कि वो इस धारणा को ख़त्म करना चाहते हैं कि उनकी जाति मुसलमानों के ख़िलाफ़ है.
2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सहनी के साथ बिहार के कई इलाक़ों का दौरा किया था. इसके अलावा सहनी पर जनवरी, 2015 में हुए अज़ीज़पुर दंगों के पीछे होने के आरोप भी लगे थे.
ये दंगा वैशाली ज़िले के एक गांव में हुआ था जहां निषाद समुदाय बहुसंख्यक है. इस दंगे में मुस्लिम समुदाय के चार व्यक्तियों की मौत हुई थी.
निषाद और नदियों से जुड़े कारोबार करने वाले समुदायों के लिए मुश्किलें तब आनी शुरू हुईं जब पुल, बैराज और बांध बनने लगे. मिसाल के तौर पर फ़रक्का बराज बनने के बाद इन समुदायों को भारी आर्थिक नुक़सान हुआ.
गंगा और उसकी सहायक नदियों में चलने वाली नावों की संख्या में तेज़ी से गिरावट आई है.
बैराज के बनने से नदियों में ऊपर से मछलियां आनी कम हो गईं हैं. नतीजन, कई तालाब और नदियां होने के बावजूद बिहार अब मछलियों के लिए आंध्र प्रदेश पर निर्भर हो गया है.
यही वजह है कि पिछले साल जब राज्य सरकार ने आंध्र प्रदेश से आने वाली मछलियों पर ये दलील देकर पाबंदी लगाई कि इनसे कैंसर हो रहा है तो इस कारोबार से जुड़े लोगों ने इस पर शक ज़ाहिर किया.
पिछले कई सालों में सहनी जाति के लोग बड़ी संख्या में बेरोज़गार हुए और प्रवासी मज़दूर बनकर दूसरे राज्यों में पलायन कर गए. इनमें से कुछ तो अपराध की दुनिया में शामिल हो गए.
इस हालात को भांपकर ही ख़ुद को 'सन ऑफ़ मल्लाह' (मल्लाह का बेटा) कहने वाले मुकेश सहनी ने वीआईपी बनाई. पार्टी बनाने के पीछे निश्चित तौर पर उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा थी.
निषाद समुदाय के राजनीतिक महत्व को समझते हुए ही सालों पहले उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मिर्ज़ापुर की पूर्व दस्युरानी फूलन देवी को टिकट दिया था.
Tuesday, April 2, 2019
लेह में सेना ने सिंधु नदी पर 40 दिन में बना दिया 260 फीट का सस्पेंशन ब्रिज
श्रीनगर. भारतीय सेना के जवानों ने इंजीनियरिंग की मिसाल कायम की है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लेह में सिंधु नदी पर 260 फीट लंबा सस्पेंशन ब्रिज महज 40 दिन में बना दिया। इस नदी पर बना यह सबसे लंबा संस्पेंशन ब्रिज है। सोमवार को यह मैत्री ब्रिज आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इस मौके पर लोगों ने सेना का शुक्रिया अदा किया।
यह पुल लेह के लोगों और सेना के संबंधों का प्रतीक
सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के कॉम्बेट इंजीनियर्स ने यह पुल लेह के छोग्लाम्सार गांव में बनाया है। यह पुल लेह-लद्दाख क्षेत्र में सेना और आम जनता के बीच संबंधों का प्रतीक है। इसलिए इसे मैत्री पुल नाम दिया गया है। इस पुल को बनाने में करीब 500 टन उपकरण और निर्माण सामग्री यहां लाई गई।
89 साल के सेवानिवृत सैनिक नायक फुंचोक आंगदस और 1947 से लेकर कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके पूर्व सैनिकों ने सोमवार को इस पुल का उद्घाटन किया। इस मौके पर सेना और स्थानीय प्रशासन के कई अफसर मौजूद रहे।
लद्दाख के 3 गांवों के लिए मददगार रहेगा यह पुल
मैत्री पुल के बनने से लद्दाख के लोगों को बड़ी राहत मिली है। यह पुल लद्दाख के तीन सबसे बड़े गांवों छोग्लाम्सार, स्तोक और छुछोत के लोगों के लिए मददगार साबित होगा।
a'10 सेमी के 60 टुकड़े ट्रैक किए गए'
नासा प्रमुख जिम ब्राइडनस्टाइन अपने कर्मचारियों को संबोधित कर कर रहे थे। उन्होंने कहा, "हम भारतीय सैटेलाइट के टुकड़ों को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब तक हमने 10 सेमी या उससे बड़े 60 टुकड़ों को ट्रैक किया है।" यह सैटेलाइट आईएसएस से नीचे स्थित था।
ब्राइडनस्टाइन के मुताबिक, "24 टुकड़े आईएसएस के पास चक्कर लगा रहे हैं, यह खतरनाक साबित हो सकते हैं। चिंता की बात यह है कि सैटेलाइट नष्ट किए जाने के बाद मलबा आईएसएस के ऊपर पहुंच गया है। इस तरह की गतिविधियां भविष्य में मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए अच्छी साबित नहीं होंगी। यह हमें स्वीकार्य नहीं है। नासा का रुख इस मामले में काफी स्पष्ट है।"
वहीं, अमेरिकी सेना के मुताबिक- अब तक 10 सेमी से बड़े करीब 23 हजार टुकड़े ट्रैक किए गए हैं। ये टुकड़े मलबे के रूप में फैले हैं। इनमें 3 हजार टुकड़े 2007 में चीनी एंटी-सैटेलाइट टेस्ट में निकले थे।
नासा चीफ ने यह भी कहा कि आईएसएस से टुकड़ों के टकराने का खतरा 44% तक बढ़ चुका है। हालांकि यह खतरा समय के साथ कम हो जाएगा क्योंकि वायुमंडल में प्रवेश के साथ ही मलबा जल जाएगा।
यह पुल लेह के लोगों और सेना के संबंधों का प्रतीक
सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के कॉम्बेट इंजीनियर्स ने यह पुल लेह के छोग्लाम्सार गांव में बनाया है। यह पुल लेह-लद्दाख क्षेत्र में सेना और आम जनता के बीच संबंधों का प्रतीक है। इसलिए इसे मैत्री पुल नाम दिया गया है। इस पुल को बनाने में करीब 500 टन उपकरण और निर्माण सामग्री यहां लाई गई।
89 साल के सेवानिवृत सैनिक नायक फुंचोक आंगदस और 1947 से लेकर कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके पूर्व सैनिकों ने सोमवार को इस पुल का उद्घाटन किया। इस मौके पर सेना और स्थानीय प्रशासन के कई अफसर मौजूद रहे।
लद्दाख के 3 गांवों के लिए मददगार रहेगा यह पुल
मैत्री पुल के बनने से लद्दाख के लोगों को बड़ी राहत मिली है। यह पुल लद्दाख के तीन सबसे बड़े गांवों छोग्लाम्सार, स्तोक और छुछोत के लोगों के लिए मददगार साबित होगा।
a'10 सेमी के 60 टुकड़े ट्रैक किए गए'
नासा प्रमुख जिम ब्राइडनस्टाइन अपने कर्मचारियों को संबोधित कर कर रहे थे। उन्होंने कहा, "हम भारतीय सैटेलाइट के टुकड़ों को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब तक हमने 10 सेमी या उससे बड़े 60 टुकड़ों को ट्रैक किया है।" यह सैटेलाइट आईएसएस से नीचे स्थित था।
ब्राइडनस्टाइन के मुताबिक, "24 टुकड़े आईएसएस के पास चक्कर लगा रहे हैं, यह खतरनाक साबित हो सकते हैं। चिंता की बात यह है कि सैटेलाइट नष्ट किए जाने के बाद मलबा आईएसएस के ऊपर पहुंच गया है। इस तरह की गतिविधियां भविष्य में मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए अच्छी साबित नहीं होंगी। यह हमें स्वीकार्य नहीं है। नासा का रुख इस मामले में काफी स्पष्ट है।"
वहीं, अमेरिकी सेना के मुताबिक- अब तक 10 सेमी से बड़े करीब 23 हजार टुकड़े ट्रैक किए गए हैं। ये टुकड़े मलबे के रूप में फैले हैं। इनमें 3 हजार टुकड़े 2007 में चीनी एंटी-सैटेलाइट टेस्ट में निकले थे।
नासा चीफ ने यह भी कहा कि आईएसएस से टुकड़ों के टकराने का खतरा 44% तक बढ़ चुका है। हालांकि यह खतरा समय के साथ कम हो जाएगा क्योंकि वायुमंडल में प्रवेश के साथ ही मलबा जल जाएगा।
Tuesday, March 26, 2019
राहुल के वादे में नई बात, 72 हजार रुपए सालाना घर की गृहिणी के खाते में जाएंगे
नई दिल्ली. देश के पांच करोड़ अति गरीब परिवारों को सालाना 72 हजार रुपए मदद देने वाले कांग्रेस के वादे में एक दिन बाद ही मंगलवार को नई बात कही गई। कहा गया कि यह पैसा घर की गृहिणी के खाते में डाला जाएगा। इससे पहले सोमवार को राहुल गांधी ने पहली बार न्यूनतम आय गारंटी योजना की विस्तृत जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि न्यूनतम आय की सीमा 12 हजार रुपए होगी। हिंदुस्तान के 20% सबसे गरीब परिवारों की न्यूनतम आय 12 हजार रु. महीना तय होगी। योजना के तहत अगर किसी परिवार की मासिक आय 6 हजार है तो वेतनांतर 6 हजार सरकार देगी।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने मंगलवार को कांग्रेस की घोषणा पर दोबारा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा, ‘‘यह टॉपअप स्कीम नहीं है, 5 करोड़ परिवार और 25 करोड़ लोगों को 72 हजार रुपए सालाना मिलेगा। यह महिलाओं पर केंद्रित योजना है। कांग्रेस महिलाओं के खातों में पैसे जमा कराएगी। योजना गरीबी दूर करने के लिए अहम होगी। हम गरीबों के साथ न्याय करना चाहते हैं।’’
‘मोदीजी पाखंड के पर्याय हैं’
सुरजेवाला ने कहा, ‘‘मोदीजी से पूछना चाहता हूं कि क्या आप न्याय के विरोधी हैं? आपके नेता इस योजना का विरोध कर रहे हैं। मोदीजी पाखंड के पर्याय बन गए हैं। आप कुछ अमीरों को पैसे दे सकते हैं, लेकिन गरीबों को नहीं।’’
राहुल ने कहा, ''यह ऐतिहासिक योजना है। अगर नरेंद्र मोदी देश के सबसे अमीर लोगों को पैसा दे सकते हैं, तो कांग्रेस सबसे गरीब लोगों को पैसा दे सकती है। तीन राज्यों में कांग्रेस ने वायदा किया था। 10 दिन में कर्जा माफ होगा। मैं यहां भी कह रहा हूं, वायदा पूरा होगा। पहले पायलट प्रोजेक्ट चलेगा। फिर पूरी स्कीम चलेगी।''
''प्रधानमंत्री आपसे कहते हैं कि उन्होंने किसानों को पैसा दिया। 3.5 रुपए उन्होंने किसानों को दिए। आपको गुमराह किया जा रहा है। कुछ लोगों को लाखों करोड़ों रुपए दिए जा रहे हैं। 5 करोड़ परिवारों और 25 करोड़ लोगों को डायरेक्ट इस स्कीम का फायदा मिलेगा।''
''न्यूनतम आय की सीमा और लोगों की कमाई का अंतर गरीबों को मिलेगा। मतलब अगर किसी परिवार की सैलरी 6 हजार है तो 12 हजार में से जितना कम पड़ेगा उतना सरकार देगी। हमने पहले मनरेगा दिया था, अब इस योजना को भी पूरा करेंगे।''
21वीं सदी में गरीब रहें, कांग्रेस को यह मंजूर नहीं
राहुल ने कहा कि देश का एक झंडा है और प्रधानमंत्रीजी की राजनीति से दो हिंदुस्तान बन रहे हैं। एक अनिल अंबानी जैसों का और दूसरा गरीबों का। हमने लाखों लोगों से बात कर के अपना घोषणापत्र बनाया है। कांग्रेस को यह मंजूर नहीं है कि 21वीं सदी में भारत में गरीब रहें। अब अमीरों और गरीबों का हिंदुस्तान नहीं रहेगा। यह सबका बराबर हिंदुस्तान होगा।
अफसर समेत 7 लोग गिरफ्तार
अल्पसंख्यक समुदाय ने रविवार को कराची में प्रदर्शन किया था। इसके बाद सुषमा स्वराज ने पाक स्थित भारतीय उच्चायोग से मामले की जानकारी मांगी थी। पुलिस ने सोमवार को काजी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
होली की शाम (21 मार्च) कुछ लोगों ने रवीना और रीना का उनके घर से अपहरण कर लिया था। दोनों बहनें सिंध प्रांत के घोटकी जिले की रहने वाली हैं। उनकी जबरन शादी कराने से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए थे। एक वीडियो में लड़की ने कहा था कि उसे जबरन इस्लाम कबूल कराया गया।
बीजिंग. चीन के कस्टम विभाग ने उन 30 हजार मानचित्रों को नष्ट कर दिया, जिनमें अरुणाचल प्रदेश और ताइवान को उनके कब्जे में नहीं दिखाया गया था। इन वैश्विक मानचित्रों की छपाई चीन में ही हुई थी। चीनी के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि सारे नक्शे किसी अज्ञात देश में भेजे जाने थे।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने मंगलवार को कांग्रेस की घोषणा पर दोबारा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा, ‘‘यह टॉपअप स्कीम नहीं है, 5 करोड़ परिवार और 25 करोड़ लोगों को 72 हजार रुपए सालाना मिलेगा। यह महिलाओं पर केंद्रित योजना है। कांग्रेस महिलाओं के खातों में पैसे जमा कराएगी। योजना गरीबी दूर करने के लिए अहम होगी। हम गरीबों के साथ न्याय करना चाहते हैं।’’
‘मोदीजी पाखंड के पर्याय हैं’
सुरजेवाला ने कहा, ‘‘मोदीजी से पूछना चाहता हूं कि क्या आप न्याय के विरोधी हैं? आपके नेता इस योजना का विरोध कर रहे हैं। मोदीजी पाखंड के पर्याय बन गए हैं। आप कुछ अमीरों को पैसे दे सकते हैं, लेकिन गरीबों को नहीं।’’
राहुल ने कहा, ''यह ऐतिहासिक योजना है। अगर नरेंद्र मोदी देश के सबसे अमीर लोगों को पैसा दे सकते हैं, तो कांग्रेस सबसे गरीब लोगों को पैसा दे सकती है। तीन राज्यों में कांग्रेस ने वायदा किया था। 10 दिन में कर्जा माफ होगा। मैं यहां भी कह रहा हूं, वायदा पूरा होगा। पहले पायलट प्रोजेक्ट चलेगा। फिर पूरी स्कीम चलेगी।''
''प्रधानमंत्री आपसे कहते हैं कि उन्होंने किसानों को पैसा दिया। 3.5 रुपए उन्होंने किसानों को दिए। आपको गुमराह किया जा रहा है। कुछ लोगों को लाखों करोड़ों रुपए दिए जा रहे हैं। 5 करोड़ परिवारों और 25 करोड़ लोगों को डायरेक्ट इस स्कीम का फायदा मिलेगा।''
''न्यूनतम आय की सीमा और लोगों की कमाई का अंतर गरीबों को मिलेगा। मतलब अगर किसी परिवार की सैलरी 6 हजार है तो 12 हजार में से जितना कम पड़ेगा उतना सरकार देगी। हमने पहले मनरेगा दिया था, अब इस योजना को भी पूरा करेंगे।''
21वीं सदी में गरीब रहें, कांग्रेस को यह मंजूर नहीं
राहुल ने कहा कि देश का एक झंडा है और प्रधानमंत्रीजी की राजनीति से दो हिंदुस्तान बन रहे हैं। एक अनिल अंबानी जैसों का और दूसरा गरीबों का। हमने लाखों लोगों से बात कर के अपना घोषणापत्र बनाया है। कांग्रेस को यह मंजूर नहीं है कि 21वीं सदी में भारत में गरीब रहें। अब अमीरों और गरीबों का हिंदुस्तान नहीं रहेगा। यह सबका बराबर हिंदुस्तान होगा।
अफसर समेत 7 लोग गिरफ्तार
अल्पसंख्यक समुदाय ने रविवार को कराची में प्रदर्शन किया था। इसके बाद सुषमा स्वराज ने पाक स्थित भारतीय उच्चायोग से मामले की जानकारी मांगी थी। पुलिस ने सोमवार को काजी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
होली की शाम (21 मार्च) कुछ लोगों ने रवीना और रीना का उनके घर से अपहरण कर लिया था। दोनों बहनें सिंध प्रांत के घोटकी जिले की रहने वाली हैं। उनकी जबरन शादी कराने से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए थे। एक वीडियो में लड़की ने कहा था कि उसे जबरन इस्लाम कबूल कराया गया।
बीजिंग. चीन के कस्टम विभाग ने उन 30 हजार मानचित्रों को नष्ट कर दिया, जिनमें अरुणाचल प्रदेश और ताइवान को उनके कब्जे में नहीं दिखाया गया था। इन वैश्विक मानचित्रों की छपाई चीन में ही हुई थी। चीनी के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि सारे नक्शे किसी अज्ञात देश में भेजे जाने थे।
Wednesday, March 20, 2019
श्रीदेवी, दीपिका से लेकर नीता अंबानी को साड़ी पहनाने वाली
दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा और ईशा अंबानी समेत तमाम हस्तियों ने धूमधाम से अपनी शादियां कीं.
इस दौरान उनकी ड्रेसेज़, साड़ियां और गाउन काफ़ी चर्चा में रहे.
लेकिन क्या आपको पता है कि नीता अंबानी जैसी शख्सियत को साड़ी पहनाने वाली महिला कौन है?
ये महिला डॉली जैन हैं जो ईशा अंबानी, दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा, सोनम कपूर की शादियों में सभी मौकों पर साड़ी और लहंगा पहनाने का काम कर चुकी हैं.
लेकिन सिनेमा जगत की तमाम सेलिब्रिटीज़ को साड़ी पहनाने वाली डॉली जैन को कभी साड़ी पहनना बिलकुल पसंद नहीं था.
साड़ी के नाम पर आता थारोना
बीबीसी से खास बातचीत में डॉली जैन कहती है कि, "मैं बंगलौर में पली बढ़ी हूँ. मैं सिर्फ जीन्स, टीशर्ट, स्कर्ट्स में ही रहती थी लेकिन जब मेरी शादी कोलकाता में हुई तब मुझे पता चला कि मुझे ससुराल में सिर्फ साड़ी ही पहनने की अनुमति है."
"ये जानने के बाद में बहुत रोई थी. मुझे साड़ी पहनने में घंटों लगते थे. मैं हमेशा इसी बात पर रोती थी कि मेरे ससुराल वाले कैसे हैं…लेकिन तब मैंने इसे अपनी मजबूरी समझकर साड़ी पहनना शुरू कर दिया और सोचा कि अगर मुझे यही पहनना है तो मुझे इसे स्टाइल भी करना चाहिए फिर मैंने साड़ी को अलग-अलग तरीके से पहनना शुरू किया."
"मैं जब भी आस-पड़ोस में शादी या त्यौहार के मौके पर जाती थी तो मेरे पड़ोसी मेरे साड़ी बांधने की कला की खूब तारीफ़ करते थे, और तब इस तरह से मेरा रुझान इस ओर बढ़ने लगा और मैंने इसे प्रोफेशन बनाने के बारे में सोचा."
"आज सोचती हूँ तो लगता है कि अच्छा हुआ कि मेरे ससुराल वालों ने मुझे घर पर कुछ और नहीं पहनने दिया क्योंकि आज में जो भी हूँ उनकी ही बदौलत हूँ."
लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाली डॉली कहती हैं, "शुरू - शुरू में सब कुछ नामुमकिन था क्योंकि लोगों को लगता था कि साड़ी बांधना और पहनना मेरा शौक है. मैंने अपने पिता से ये बात कही तो उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा दुनिया अवार्ड की भाषा को ही समझती है और अगर तुझे अपनी अलग पहचान बनानी है तो पहले अपना नाम और हुनर दुनिया को बताओ."
"ये सुनने के बाद मैं ससुराल में रात को जब सब सो जाया करते थे तब 11 बजे से लेकर सुबह 3 बजे तक पुतले पर रोज़ साड़ी बांधने का प्रयास किया करती थी और जब मैंने एक साड़ी को 80 तरह से बांधना सीख लिया तो लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड वालों को सीडी भेजी. उन्हें मेरा काम अच्छा लगा तब उन्होंने मुझे पुरस्कार दिया"
"इसके साल बाद मैंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा और एक ही साड़ी को 325 अलग-अलग तरह से पहनने और बांधने का नया रिकॉर्ड बनाया और साथ ही एक साड़ी को साढ़े 18 सेकंड में पहनने का रिकॉर्ड भी बनाया.
आज बॉलीवुड की अधिकतर अभिनेत्रियों की पहली पसंद डॉली जैन हैं.
लेकिन क्या डॉली के लिए बॉलीवुड में अपने कदम जमा पाना इतना आसान था?
इस पर डॉली कहती हैं, 'मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतने बड़े कलाकारों और लोगों से बुलावा आएगा. मैं बहुत साधारण परिवार से हूँ और मैं सिर्फ आस-पड़ोस और उन्हीं की शादियों में साड़ी बांधा करती थी. मैंने कभी इसे इतनी संजीदगी से नहीं लिया. मेरे एक रिश्तेदार मुंबई में रहते थे उन्होंने मुझे मुंबई बुलाया था और मैंने पहली बार जब श्रीदेवी को देखा अपनी आँखों के सामने तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मुझे उन्हें साड़ी पहनाने का मौका मिला है."
"साड़ी बांधने के बाद जब उन्होंने कहा कि डॉली तुम्हारी उँगलियों में जादू है तो मुझे उनकी बातों ने इस कदर प्रभावित किया कि मैं वापस घर आते वक़्त यही सोचती रही कि अगर इतना बड़ा इंसान कह रहा है कि तुम्हारी उँगलियों में जादू है तो बस अब दुनिया को जादू दिखाने का टाइम आ गया. श्रीदेवी की कही बात ने मेरी दुनिया पलट दी."
इस दौरान उनकी ड्रेसेज़, साड़ियां और गाउन काफ़ी चर्चा में रहे.
लेकिन क्या आपको पता है कि नीता अंबानी जैसी शख्सियत को साड़ी पहनाने वाली महिला कौन है?
ये महिला डॉली जैन हैं जो ईशा अंबानी, दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा, सोनम कपूर की शादियों में सभी मौकों पर साड़ी और लहंगा पहनाने का काम कर चुकी हैं.
लेकिन सिनेमा जगत की तमाम सेलिब्रिटीज़ को साड़ी पहनाने वाली डॉली जैन को कभी साड़ी पहनना बिलकुल पसंद नहीं था.
साड़ी के नाम पर आता थारोना
बीबीसी से खास बातचीत में डॉली जैन कहती है कि, "मैं बंगलौर में पली बढ़ी हूँ. मैं सिर्फ जीन्स, टीशर्ट, स्कर्ट्स में ही रहती थी लेकिन जब मेरी शादी कोलकाता में हुई तब मुझे पता चला कि मुझे ससुराल में सिर्फ साड़ी ही पहनने की अनुमति है."
"ये जानने के बाद में बहुत रोई थी. मुझे साड़ी पहनने में घंटों लगते थे. मैं हमेशा इसी बात पर रोती थी कि मेरे ससुराल वाले कैसे हैं…लेकिन तब मैंने इसे अपनी मजबूरी समझकर साड़ी पहनना शुरू कर दिया और सोचा कि अगर मुझे यही पहनना है तो मुझे इसे स्टाइल भी करना चाहिए फिर मैंने साड़ी को अलग-अलग तरीके से पहनना शुरू किया."
"मैं जब भी आस-पड़ोस में शादी या त्यौहार के मौके पर जाती थी तो मेरे पड़ोसी मेरे साड़ी बांधने की कला की खूब तारीफ़ करते थे, और तब इस तरह से मेरा रुझान इस ओर बढ़ने लगा और मैंने इसे प्रोफेशन बनाने के बारे में सोचा."
"आज सोचती हूँ तो लगता है कि अच्छा हुआ कि मेरे ससुराल वालों ने मुझे घर पर कुछ और नहीं पहनने दिया क्योंकि आज में जो भी हूँ उनकी ही बदौलत हूँ."
लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाली डॉली कहती हैं, "शुरू - शुरू में सब कुछ नामुमकिन था क्योंकि लोगों को लगता था कि साड़ी बांधना और पहनना मेरा शौक है. मैंने अपने पिता से ये बात कही तो उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा दुनिया अवार्ड की भाषा को ही समझती है और अगर तुझे अपनी अलग पहचान बनानी है तो पहले अपना नाम और हुनर दुनिया को बताओ."
"ये सुनने के बाद मैं ससुराल में रात को जब सब सो जाया करते थे तब 11 बजे से लेकर सुबह 3 बजे तक पुतले पर रोज़ साड़ी बांधने का प्रयास किया करती थी और जब मैंने एक साड़ी को 80 तरह से बांधना सीख लिया तो लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड वालों को सीडी भेजी. उन्हें मेरा काम अच्छा लगा तब उन्होंने मुझे पुरस्कार दिया"
"इसके साल बाद मैंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा और एक ही साड़ी को 325 अलग-अलग तरह से पहनने और बांधने का नया रिकॉर्ड बनाया और साथ ही एक साड़ी को साढ़े 18 सेकंड में पहनने का रिकॉर्ड भी बनाया.
आज बॉलीवुड की अधिकतर अभिनेत्रियों की पहली पसंद डॉली जैन हैं.
लेकिन क्या डॉली के लिए बॉलीवुड में अपने कदम जमा पाना इतना आसान था?
इस पर डॉली कहती हैं, 'मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतने बड़े कलाकारों और लोगों से बुलावा आएगा. मैं बहुत साधारण परिवार से हूँ और मैं सिर्फ आस-पड़ोस और उन्हीं की शादियों में साड़ी बांधा करती थी. मैंने कभी इसे इतनी संजीदगी से नहीं लिया. मेरे एक रिश्तेदार मुंबई में रहते थे उन्होंने मुझे मुंबई बुलाया था और मैंने पहली बार जब श्रीदेवी को देखा अपनी आँखों के सामने तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मुझे उन्हें साड़ी पहनाने का मौका मिला है."
"साड़ी बांधने के बाद जब उन्होंने कहा कि डॉली तुम्हारी उँगलियों में जादू है तो मुझे उनकी बातों ने इस कदर प्रभावित किया कि मैं वापस घर आते वक़्त यही सोचती रही कि अगर इतना बड़ा इंसान कह रहा है कि तुम्हारी उँगलियों में जादू है तो बस अब दुनिया को जादू दिखाने का टाइम आ गया. श्रीदेवी की कही बात ने मेरी दुनिया पलट दी."
Friday, March 8, 2019
राजस्थान के बीकानेर में वायुसेना का मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित
राजस्थान के बीकानेर में भारतीय वायुसेना का मिग-21 विमान हादसे का शिकार हो गया है. गनीमत रही कि इस हादसे में पायलट बाल-बाल बच गया. साथ ही यह विमान रिहायशी इलाके से दूर खेत में गिरा. बताया जा रहा है कि लड़ाकू विमान मिग-21 के गिरने से पहले इसको उड़ा रहे पायलट पैराशूट लेकर कूद गए. फिलहाल, पायलट सुरक्षित बताया जा रहे हैं. यह लड़ाकू विमान बीकानेर के पास गिरा और इसमें आग लग गई.
बताया जा रहा है कि राजस्थान के बीकानेर के नाल एयर बेस से उड़ान भरने के बाद यह विमान एक पक्षी से टकराया और हादसे का शिकार हो गया. हालांकि हादसे की वजह को लेकर अभी तक पूरी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. मामले की जांच के बाद ही हादसे के कारणों का पता चल पाएगा.
यह पहला मौका नहीं है, जब मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हुआ है. इससे पहले भी कई बार मिग-21 हादसे का शिकार हो चुका है. इसको लेकर मिग-21 पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हाल ही में जुलाई 2018 में हिमाचल के कांगड़ा में भी मिग-21 क्रैश हो गया था. इस हादसे में मिग-21 को उड़ा रहे पायलट मीत कुमार की जान चली गई थी.
राजस्थान के बीकानेर में भारतीय वायुसेना का मिग-21 उस समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. 27 फरवरी को भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्द्धमान ने मिग-21 से ही भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान F-16 को मार गिराया था.
आपको बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट घुसकर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर हमला बोला था. इसमें 280 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की बात कही जा रही है. इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर हवाई हमला करने की कोशिश की थी, तो भातीय वायुसेना के लड़ाकू विमान मिग-21 ने मुंहतोड़ जवाब दिया था.
दरअसल, होटल में अर्जुन की मौत हो जाती है और इल्जाम नैना पर लगता है. अमृता सिंह ने सनी की मां का रोल निभाया है. अमिताभ बच्चन प्रॉसिक्यूटर के रोल में हैं, वो नैना का केस टैकल करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. अब फिल्म की कहानी का तानाबाना कुछ सवालों में बुनने की कोशिश हुई है. जैसे अर्जुन की अचानक मौत कैसे हुई? पैसे की मांग करने वाला होटल के रूम पर आता है, मगर पैसे लिए बिना क्यों चला जाता है? अमिताभ का किरदार क्या है? ब्लैकमेलर कौन है? अर्जुन की हत्या किसने की? ऐसे तमाम सवाल जानने के लिए फिल्म देखना होगा. वैसे इसमें सस्पेंस अर्जुन की हत्या से अलग वो चीज है जो फिल्म के टाइटल से जुड़ी हुई है. इंटरवल तक फिल्म में जबरदस्त सस्पेंस है.
फिल्म की कहानी मजबूत है. शुरू से लेकर अंत तक सस्पेंस बनाए रखा गया है. किरदारों को किस समय पर कैसे फिल्म में पेश करना है इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है. कहानी जिस तरह की है, उसे फिल्माना चुनौतीपूर्ण काम होता है. लेकिन इसके लिए निर्देशन और सम्पादन की तारीफ़ की जानी चाहिए. चूंकि फिल्म तमाम सवालों के जरिए बुनी गई है, इस वजह से एक सवाल का जवाब मिलने पर अगला सवाल फिल्म में दिलचस्पी बनाए रखता है. सीन्स अच्छे बन पड़े हैं. बदला की सबसे अच्छी बात यही है कि ये बोर नहीं करती और अंत तक दिलचस्पी बनाए रखती है.
बताया जा रहा है कि राजस्थान के बीकानेर के नाल एयर बेस से उड़ान भरने के बाद यह विमान एक पक्षी से टकराया और हादसे का शिकार हो गया. हालांकि हादसे की वजह को लेकर अभी तक पूरी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. मामले की जांच के बाद ही हादसे के कारणों का पता चल पाएगा.
यह पहला मौका नहीं है, जब मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हुआ है. इससे पहले भी कई बार मिग-21 हादसे का शिकार हो चुका है. इसको लेकर मिग-21 पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हाल ही में जुलाई 2018 में हिमाचल के कांगड़ा में भी मिग-21 क्रैश हो गया था. इस हादसे में मिग-21 को उड़ा रहे पायलट मीत कुमार की जान चली गई थी.
राजस्थान के बीकानेर में भारतीय वायुसेना का मिग-21 उस समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. 27 फरवरी को भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्द्धमान ने मिग-21 से ही भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान F-16 को मार गिराया था.
आपको बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट घुसकर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर हमला बोला था. इसमें 280 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की बात कही जा रही है. इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर हवाई हमला करने की कोशिश की थी, तो भातीय वायुसेना के लड़ाकू विमान मिग-21 ने मुंहतोड़ जवाब दिया था.
दरअसल, होटल में अर्जुन की मौत हो जाती है और इल्जाम नैना पर लगता है. अमृता सिंह ने सनी की मां का रोल निभाया है. अमिताभ बच्चन प्रॉसिक्यूटर के रोल में हैं, वो नैना का केस टैकल करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. अब फिल्म की कहानी का तानाबाना कुछ सवालों में बुनने की कोशिश हुई है. जैसे अर्जुन की अचानक मौत कैसे हुई? पैसे की मांग करने वाला होटल के रूम पर आता है, मगर पैसे लिए बिना क्यों चला जाता है? अमिताभ का किरदार क्या है? ब्लैकमेलर कौन है? अर्जुन की हत्या किसने की? ऐसे तमाम सवाल जानने के लिए फिल्म देखना होगा. वैसे इसमें सस्पेंस अर्जुन की हत्या से अलग वो चीज है जो फिल्म के टाइटल से जुड़ी हुई है. इंटरवल तक फिल्म में जबरदस्त सस्पेंस है.
फिल्म की कहानी मजबूत है. शुरू से लेकर अंत तक सस्पेंस बनाए रखा गया है. किरदारों को किस समय पर कैसे फिल्म में पेश करना है इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है. कहानी जिस तरह की है, उसे फिल्माना चुनौतीपूर्ण काम होता है. लेकिन इसके लिए निर्देशन और सम्पादन की तारीफ़ की जानी चाहिए. चूंकि फिल्म तमाम सवालों के जरिए बुनी गई है, इस वजह से एक सवाल का जवाब मिलने पर अगला सवाल फिल्म में दिलचस्पी बनाए रखता है. सीन्स अच्छे बन पड़े हैं. बदला की सबसे अच्छी बात यही है कि ये बोर नहीं करती और अंत तक दिलचस्पी बनाए रखती है.
Subscribe to:
Posts (Atom)